आईटीबीपी के हिमवीरों ने लद्दाख सीमा पर -35 तापमान में फहराया तिरंगा

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आज गणतंत्र दिवस है और आज के दिन पूरे देश में राष्ट्रीय ध्वज राष्ट्रगान के साथ बड़े ही आन-बान और शान से फहराया जाता है. आज ही के दिन दिल्ली के इंडिया गेट पर भारत के राष्ट्रपति भी तिरंगा झंडा फहराते हैं. आज जहां सुबह से ही पूरे देश में बादल छाए हैं और ठंड से लोगों की सांसें फुल रही हैं. ठंड से लोगों की हालत पस्त हो रहे हैं, वहीं सीमा पर तैनात हमारी सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवान देश की सीमाओं की रक्षा में तैनात रहकर बड़े ही आन-बान और शान से गणतंत्र दिवस मना रहे हैं. कड़कड़ाती ठंड में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के हिमवीरों ने लद्दाख सीमा पर 15000 फुट की ऊंचाई और -35 तापमान में तिरंगा झंडा फहराया.

लद्दाख सीमा पर -35 तापमान में फहराया तिरंगा

समाचार एजेंसी एएनआई ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी, ‘आईटीबीपी के हिमवीर जवानों ने बुधवार की सुबह लद्दाख सीमा पर 15000 फुट की ऊंचाई और -35 तापमान में भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झंडा फहराकर गणतंत्र दिवस मनाया.’ यह हमारे लिए गर्व और शान की बात है कि देशभक्ति से ओत-प्रोत सीमा पर तैनात सेना और अर्द्धसैनिक बलों के जवान जोश-ओ-खरोश के साथ गणतंत्र दिवस के मौके पर मां भारती के सम्मान में तिरंगा फहरा रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने दी बधाई

उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गणतंत्र दिवस 2022 के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने ट्वीट किया, “आप सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं. जय हिंद!” देश बुधवार को 73वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. हर वर्ष की तरह इस बार भी मुख्य समारोह राजधानी दिल्‍ली में राजपथ पर आयोजित किया जा रहा है.

अमेरिका ने दी भारत को बधाई

इसके साथ ही, अमेरिका ने भी भारत को गणतंत्र दिवस की बधाई दी है. व्हाइट हाउस ने भारत के 73वें गणतंत्र दिवस पर भारतीयों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी का आधार लोकतांत्रिक मूल्यों को बरकरार रखने की उनकी साझा जिम्मेदारी है. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने कहा, ‘हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के साथ मिलकर उसका गणतंत्र दिवस मना रहे हैं.’

उन्होंने कहा, ‘जब भारत के प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी पिछले साल सितंबर में व्हाइट हाउस आए थे, तब भी (अमेरिका के) राष्ट्रपति (जो) बाइडन ने कहा था कि भारत एवं अमेरिका के बीच संबंधों का मजबूत और निकट होना नियति है और इससे पूरी दुनिया को लाभ हो सकता है.’