भारत ने कोविड रोधी वैक्‍सीन की 100 करोड़ डोज लगाकर रचा इतिहास, बधाइयों का तांता

0
49

नई दिल्ली। कोरोना टीकाकरण में भारत ने 100 करोड़ डोज पार करने के साथ ही नया इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसके लिए देश के डाक्टरों, नर्सों और इसमें शामिल अन्य कर्मियों का आभार जताया है और इस सफलता का श्रेय देश के विज्ञान और उद्यम के साथ ही 130 करोड़ लोगों की सामूहिक भावना को दिया। सौ करोड़वीं डोज के ऐतिहासिक क्षण का भागीदार बनने के लिए प्रधानमंत्री खुद राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल गए और टीकाकरण का जायजा लिया। भारत की इस उपलब्धि पर दिनभर देश-विदेश से बधाइयों का तांता लगा रहा।

रच दिया इतिहास 

भारत की यह उपलब्धि कई मायनों में ऐतिहासिक रही है। इसे पूरी तरह से स्वदेश में बने टीकों से हासिल किया गया है। साथ ही भारत अधिक साधन संपन्न विकसित देशों की तुलना में ज्यादा सुचारू और तेज गति से यह सफलता हासिल करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। दुनिया में कोरोना की लगने वाली कुल 700 करोड़ डोज की 15 प्रतिशत अकेले भारत में लगी हैं।

दूसरे देशों की मदद के साथ हासिल की उपलब्धि

भारत ने अपने नागरिकों के टीकाकरण के साथ-साथ लगभग 5.5 करोड़ डोज दूसरे देशों को भी दी हैं। सबसे बड़ी बात यह रही कि 100 करोड़ में 97 करोड़ से अधिक डोज लोगों को मुफ्त में दी गईं और केवल तीन फीसद ही निजी क्षेत्र के मार्फत लगी हैं। इसमें भी निजी क्षेत्र को मुनाफा वसूली की इजाजत नहीं दी गई।

jagran

आसान नहीं रहा सफर 

कोरोना टीकाकरण में 100 करोड़ डोज तक का सफर आसान नहीं रहा है। टीकों के लिए बुनियादी ढांचे और कच्चे माल आदि की उपलब्धता की राह तो मुश्किल थी ही, बार-बार उठते रहे राजनीतिक विवादों ने कठिनाई और बढ़ा दी। 279 दिनों में हासिल की गई उपलब्धि की शुरुआत 16 जनवरी को सिर्फ हेल्थ केयर वर्कर्स के टीकाकरण के साथ हुई थी।

…और बढ़ता गया दायरा 

धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता गया और इसमें फ्रंटलाइन वर्कर्स, 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, 45 से 60 वर्ष उम्र के व्यक्ति शामिल होते गए और अंतत: एक मई से इसे 18 साल से अधिक उम्र के सभी वयस्कों के लिए खोल दिया गया।

दूसरी लहर ने बहुत कुछ सिखाया 

कोरोना की पहली लहर के अंतिम चरण में शुरू हुए इस अभियान की शुरुआत में भारत ने पड़ोसियों और मित्र देशों की भी चिंता और वैक्सीन मैत्री के तहत लगभग पांच करोड़ डोज उन्हें दीं। लेकिन अप्रैल-मई में संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया और सरकार ने सबसे पहले देश के नागरिकों को सुरक्षित करने के लिए इसके निर्यात को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया।

31 दिसंबर तक होना है सभी वयस्कों का टीकाकरण

देश की बड़ी जनसंख्या और टीकों के सीमित उत्पादन को देखते हुए भारत के टीकाकरण अभियान की सफलता पर देश-विदेश से अंगुली उठाने का क्रम जारी रहा। चौतरफा दबाव के बीच सरकार ने विदेशी टीकों के आयात को भी हरी झंडी दी और उनके लिए जरूरी ब्रिज ट्रायल की शर्तों में छूट की घोषणा की।

विदेशी कंपनियों के आगे नहीं टेके घुटने 

इसके साथ ही सरकार ने साफ कर दिया कि टीकों की आपूर्ति के लिए वह विदेशी कंपनियों की क्षतिपूर्ति जैसी शर्तों के आगे नहीं झुकेगी। आखिरकार जून में सरकार ने साफ किया कि वह 31 दिसंबर तक देश में सभी वयस्कों के टीकाकरण के लिए तैयार है और इसके लिए उसने टीकों की उपलब्धता का रोडमैप भी सामने रखा।

अव्‍यवस्‍था पर खुद संभाली कमान 

अप्रैल महीने में पूरी तरह केंद्रीयकृत टीकाकरण अभियान भी मुद्दा बना और इसमें राज्यों व निजी क्षेत्र की भागीदारी की मांग उठने लगी। कई राज्यों ने टीकों के लिए विदेशी कंपनियों को आर्डर भी देना शुरू कर दिया ताकि वह स्वतंत्र रूप से टीकाकरण अभियान चला सकें।

राज्यों के हिस्से की डोज भी केंद्र ने लगाईं

इसे देखते हुए सरकार ने मई महीने से 25-25 फीसद टीके राज्यों और निजी क्षेत्र के लिए सुरक्षित कर दिए। लेकिन एक महीने के भीतर ही राज्यों के अधीन टीकाकरण अभियान अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ने लगा और 21 जून से केंद्र ने उनके हिस्से के टीके भी खुद लगाने का फैसला किया।

88 करोड़ डोज सिर्फ कोविशील्ड की लगीं

टीकाकरण की यह उपलब्धि भारत में निर्मित सिर्फ दो टीकों कोविशील्ड और कोवैक्सीन द्वारा हासिल की गई है। इनमें लगभग 88 करोड़ डोज कोविशील्ड और 12 करोड़ कोवैक्सीन की हैं। दूसरे डोज की उपलब्धता नहीं होने के कारण स्पुतनिक-वी टीकाकरण अभियान का हिस्सा नहीं बन सका।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here