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बड़कागांव के काड़तरी और खैरातरी गांव के ग्रामीणों का देखिये जुनून, आंधी- तूफान में भी जंगलों की करते हैं रक्षा

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जहां एक और कोरोना महामारी, चक्रवात तूफान यास और बारिश से बचाव के लिए लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं ,वहीं हजारीबाग जिला अंतर्गत बड़कागांव के काड़तरी और खैरातरी गांव के ग्रामीणों का जंगल बचाने का गजब का जुनून है. काड़तरी वन समिति के गांव खैरातरी के सदस्य जंगल बचाने के लिए आंधी, तूफान और बारिश में ही जंगल की ओर चल पड़ते हैं. इन ग्रामीणों का जंगल बचाने के प्रति जज्बा को देखकर प्रखंड के लोग हैरान हैं.

जैसे ही वन रक्षा समिति के सदस्यों को जानकारी मिली कि कुछ लोग पेड़-पौधों व पेड़ की डाल को काटने के लिए जंगल पहुंचे हैं. वैसे ही वन समिति के अध्यक्ष बालेश्वर महतो, सदस्य कुलेश्वर कुमार, तुलेश्वर महतो, भुवनेश्वर प्रसाद, सविता देवी और मानको देवी जंगल पहुंचकर जंगल काटने वाले लोगों से कुल्हाड़ी छीन लिया. साथ ही पेड़ की डाल काटने वाले को सामाजिक दंड भी दिया.

इतना ही नहीं जंगल के पेड़, डाल एवं पत्ते को नहीं तोड़ने का हिदायत देकर छोड़ दिया. समिति के सक्रिय सदस्य पारा शिक्षक कुलेश्वर महतो का कहना है कि लोग बारिश का लाभ उठा कर पेड़-पौधे काटने जंगल आ जाते हैं. इसीलिए हमलोग बारिश के दिनों में भी जंगल को रक्षा करते हैं.

वहीं, वन समिति के अध्यक्ष बालेश्वर महतो ने बताया कि जब जंगलों में पेड़-पौधे कम दिखने लगे तो काफी चिंता होने लगी. हम लोगों ने एक टोली बनाकर वर्ष 2003 से जंगल को बचाने लगे. उन्होंने बताया कि पेड़-पौधे के डाल काटने पर हमलोगों ने रोक लगा दिया है. जंगल में महुआ चुनने वालों को भी आग नहीं लगाने की हिदायत दी है. इसके बावजूद भी अगर कोई जंगल में आग लगा देते हैं, तो हम सभी मिलकर आग को बुझाते हैं. पेड़-पौधे काटने वाले को सामाजिक दंड भी देते हैं.

वन समिति के अध्यक्ष बालेश्वर महतो, भुनेश्वर प्रसाद और कुलेश्वर महतो ने बताया कि जंगल बचाने के लिए जब हमलोग सक्रिय हुए, तो हमलोगों की सक्रियता को देख वन विभाग भी सक्रिय हो गया. इसके पहले वन विभाग भी सुस्त था. वन विभाग जंगलों में सड़क निर्माण, पुल-पुलिया, कुएं एवं नर्सरी लगाने के लिए 25 लाख रुपये का योजना दिया. जिसे हमलोगों ने निष्ठापूर्वक काम किया. इसके अलावा वन विभाग द्वारा आग बुझाने के लिए 10 हजार रुपये वन समिति के खाते में जमा कराया है.

वन समिति के सदस्यों ने बताया कि वर्ष 2003 से पहले बड़कागांव के महूदि जंगलों में पेड़-पौधे कम दिखने लगे थे. पहाड़ों पर सिर्फ चट्टान दिखने लगे थे, लेकिन जब से वन समिति के सदस्यों ने जंगल की सुरक्षा का जिम्मा लिया तब से जंगल घना हो गया है. अब जंगली सूअर, हिरन, कोटरा, भालू, बंदर, मोर, जंगली मुर्गा -मुर्गी, तीतर आदि जानवर दिखते हैं. कभी-कभार बाघ भी नजर आ जाता है. कई बार भैंसा एवं बैलों पर बाघ हमला कर चुका है. जंगली शिकारियों पर भी हमलोग कड़ी नजर रखते हैं.

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