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रामगढ़ में लहलहा रहीं अरहर की फसलें, किसान बोले : कम मेहनत में होती है अच्छी उपज

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रामगढ़: झारखंड के रामगढ़ जिले का दुलमी प्रखंड कृषि बाहुल्य क्षेत्र है. इस क्षेत्र की 90 फीसदी आबादी की जीविका का साधन कृषि है. दुलमी प्रखंड क्षेत्र के किसान पिछले एक दशक से अरहर की खेती को बढ़ावा देकर आर्थिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ आत्मनिर्भर हो रहे हैं. इस वर्ष लगभग 50 हेक्टेयर में अरहर की फसल लगायी गयी है, जो खेतों में लहलहाने लगी है. किसान बताते हैं कि कम मेहनत में अच्छी उपज से बेहतर आमदनी के लिए इसकी खेती की जा सकती है.

जानकारी के अनुसार रामगढ़ जिले के सिकनी, होहद, होन्हे, बगरई, भालु, कुल्ही, बोंगई, सोसो, जमीरा, उसरा सहित कई गांवों के सैकड़ों किसानों ने बड़े पैमाने पर अरहर की खेती की है. खेतों में अरहर की फसल लहलहा रही है. किसान राजेंद्र महतो ने कहा कि अरहर की खेती से प्रत्येक साल अच्छी आमदनी हो रही है. खुद से उपजाये हुए अरहर से ही सालों भर घर में दाल का उपयोग करते है.

भालू गांव के किसान मनोज कुमार महतो व डालचंद महतो ने बताया कि अरहर की खेती हमलोगों के लिए काफी फायदेमंद है. इसकी फसल लगाने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है. बावजूद इससे हमलोगों को अच्छा मुनाफा होता है. आषाढ़ माह में एक बार खेत को जोतकर अरहर की फसल को लगाते हैं. इसके बाद दिसंबर माह में इस फसल को काटते हैं. साथ ही इस खेती से दो फायदे होते हैं. एक तो अरहर की दाल तो मिलती ही है, वहीं इसकी डंठल को जलावन के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं. उधर, दलहन की खेती किये जाने के बाद सैकड़ों किसान अरहर की खेती को बढ़ावा दे रहे हैं. इसकी कीमत हमेशा अच्छी मिलती है. जिस कारण किसानों को निराशा नहीं होती है और किसान पूरी दिलचस्पी से इसी खेती करते हैं.

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